A major revelation in Motihari: Two different doctor reports on the same injury.
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| A major revelation in Motihari: Two different doctor reports on the same injury. |
लोकल पब्लिक न्यूज़/पूर्वी चम्पारण जिले के केसरिया प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के कथित मिलीभगत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। केसरिया सीएचसी के तत्कालीन प्रभारी डॉक्टर दशरथ ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने नवंबर 2023 के एक विवाद में घायल हुए एक ही व्यक्ति सरफराज अहमद खान के लिए एक ही तारीख पर दो पूरी तरह विरोधाभासी इंज्यूरी रिपोर्ट तैयार कर दीं। पहली रिपोर्ट में चोट को ‘साधारण’ बताया गया, जबकि दूसरी में उसे ‘ग्रिवियस एंड डेंजरस टू लाइफ’ (गंभीर और जानलेवा) करार दिया गया। इस फर्जीवाड़े के आधार पर आरोपी बनाए गए इमरान को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ी। अब इमरान की शिकायत पर डॉक्टर, जांच घर संचालक और प्रमुख के पति समेत आधा दर्जन लोगों के खिलाफ केसरिया थाना में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
घटना नवंबर 2023 की है। केसरिया के बैरिया गांव में हुए विवाद के दौरान सरफराज अहमद खान घायल हो गए। सरफराज के पिता ने केसरिया थाना में एफआईआर (केस नंबर 564/23) दर्ज कराई, जिसमें मुखिया मोहिबुल्लाह उर्फ मुन्ना (इमरान के चाचा), इमरान और करीब 16-22 अन्य लोगों पर हमले का आरोप लगाया गया।
इसके जवाब में आरोपी पक्ष के नाज अहमद खान (केसरिया प्रखंड प्रमुख के पति) ने जवाबी केस (केस नंबर 568/23) दर्ज कराया। इसमें आरोप लगाया गया कि विरोधी पक्ष ने मिलकर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करवाई है। इमरान ने इस पूरे प्रकरण में गड़बड़ी का शक जताते हुए सिविल सर्जन को लिखित आवेदन दिया। सिविल सर्जन के निर्देश पर जांच शुरू हुई।
जांच टीम के सामने डॉक्टर दशरथ ठाकुर ने लिखित रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने दबाव में दूसरी गंभीर इंज्यूरी रिपोर्ट तैयार की थी। पहली रिपोर्ट साधारण चोट वाली थी, लेकिन बाद में दूसरी रिपोर्ट ‘शार्प कटिंग ग्रिवियस एंड डेंजरस टू लाइफ’ की बनाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि मां वैष्णव जांच घर के संचालक दीपेंद्र कुमार ने गलत एक्स-रे प्लेट उपलब्ध कराई थी।
डॉक्टर से जब पूछा गया कि दबाव या धमकी की सूचना उन्होंने थाना प्रभारी या वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों नहीं दी, तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। इसके अलावा, तत्कालीन थानाध्यक्ष सुनील कुमार की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि दूसरी ओडी स्लिप उन्होंने ही काटकर अस्पताल भेजी थी।
इमरान की न्याय की लड़ाई और नई एफआईआर
इमरान ने लंबे समय तक इस फर्जीवाड़े का शिकार होने के बाद जिलाधिकारी और सिविल सर्जन से गुहार लगाई। उनके आवेदन पर केसरिया थाना में नई प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें शामिल हैं:
- डॉ. दशरथ ठाकुर (तत्कालीन प्रभारी, केसरिया सीएचसी)
- दीपेंद्र कुमार (जांच घर संचालक)
- नाज अहमद खान (प्रमुख पति)
- अन्य करीब आधा दर्जन लोग
वर्तमान थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि इमरान के आवेदन पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की गहन जांच की जा रही है।
यह मामला स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की मिलीभगत का गंभीर उदाहरण बन गया है। एक ही डॉक्टर द्वारा तैयार की गई दो रिपोर्टों ने पूरे मामले को उलट-पुलट कर दिया। इमरान अब पूछ रहे हैं – क्या उन्हें आखिरकार इंसाफ मिलेगा? या फिर डॉक्टर-पुलिस का यह खेल फिर से दब जाएगा?
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अब सख्त कार्रवाई की मांग हो रही है। अगर जांच में सच्चाई सामने आई तो न केवल दोषियों पर कार्रवाई होगी, बल्कि मेडिकल सर्टिफिकेट की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा।

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