Ticker

6/recent/ticker-posts

गुप्त सूचना पर कोटवा पुलिस की कार्रवाई: क्षतिग्रस्त बोलेरो से 103 लीटर ‘ऑफिसर्स चॉइस’ शराब बरामद, चालक फरार

 Kotwa police act on tip-off: 103 liters of 'Officer's Choice' liquor recovered from damaged Bolero, driver absconding. 

Kotwa police act on tip-off: 103 liters of 'Officer's Choice' liquor recovered from damaged Bolero, driver absconding.

लोकल पब्लिक न्यूज़/पूर्वी चंपारण (कोटवा): बिहार में शराबबंदी के तहत पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक बड़ी सफलता हासिल की है। 26 मार्च 2026 की मध्य रात्रि को पुलिस टीम ने संदिग्ध सिल्वर रंग की बोलेरो वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान वाहन से 12 पेटी ‘ऑफिसर्स चॉइस’ ब्रांड की शराब बरामद की गई। प्रत्येक पेटी में 48 टेट्रा पैक (180 एमएल प्रत्येक) होने के कारण कुल बरामद शराब की मात्रा लगभग 103 लीटर बताई गई है।

पुलिस को देखते ही वाहन चालक मौके से गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। हालांकि, पुलिस ने चालक की पहचान कर ली है और उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है। कोटवा थानाध्यक्ष करण सिंह ने बताया कि मामले में बिहार उत्पाद अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, “अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ हमारा अभियान निरंतर जारी रहेगा। किसी भी स्तर पर शराब तस्करी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

यह कार्रवाई बिहार सरकार की शराबबंदी नीति को मजबूती देने वाली है। राज्य में अवैध शराब की तस्करी अक्सर पड़ोसी राज्यों (उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि) से होती है, और पुलिस ऐसे वाहनों पर लगातार नजर रख रही है। बोलेरो जैसी क्षतिग्रस्त या संदिग्ध गाड़ियों का इस्तेमाल तस्कर अक्सर करते हैं, क्योंकि ये कम ध्यान आकर्षित करती हैं।

बिहार में वर्ष 2016 से लागू शराबबंदी नीति महिलाओं की सुरक्षा, घरेलू हिंसा में कमी और सामाजिक सुधार के उद्देश्य से शुरू की गई थी। सरकार का दावा है कि इसके बाद दूध की खपत बढ़ी और कुछ अपराधों में कमी आई। लेकिन शराब की तस्करी और जहरीली शराब से होने वाली घटनाएं चुनौती बनी हुई हैं। 

2026 के शुरुआती दो महीनों (जनवरी-फरवरी) में बिहार पुलिस ने लगभग 7.41 लाख लीटर शराब बरामद की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18% अधिक है। पूरे 2025 में 37.75 लाख लीटर शराब जब्त की गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये थी। राज्य सरकार ने शराबबंदी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को और मजबूत किया है, जिसमें अंतरराज्यीय छापेमारी भी शामिल है।

पूर्वी चम्पारण कोटवा क्षेत्र में भी पुलिस लगातार ऐसे अभियान चला रही है। दिसंबर 2025 में ही यहां 110 लीटर और 432 लीटर शराब बरामदगी की खबरें आई थीं, जो दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर तस्करी के प्रयास जारी हैं, लेकिन पुलिस की सतर्कता भी बढ़ी हुई है।

क्या कहते हैं अधिकारी?

थानाध्यक्ष करण सिंह ने स्पष्ट किया कि शराब तस्करों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। फरार चालक की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए टीमों को अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस का मानना है कि गुप्त सूचनाओं पर आधारित ऐसी कार्रवाइयां तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में मददगार साबित होंगी।

बिहार सरकार शराबबंदी को और प्रभावी बनाने के लिए विशेष ब्यूरो के माध्यम से काम कर रही है। साथ ही, जनता से अपील की जाती है कि अवैध शराब की किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

यह घटना बिहार में शराबबंदी कानून के सख्त क्रियान्वयन का उदाहरण है। पुलिस का कहना है कि ऐसे प्रयासों से न केवल अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा, बल्कि समाज में शराब मुक्त वातावरण बनाने में भी मदद मिलेगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ