Major police-smuggler nexus exposed in Bihar: 4 arrested with 419 kg of marijuana, 3 policemen including station in-charge suspended.
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| Major police-smuggler nexus exposed in Bihar: 4 arrested with 419 kg of marijuana, 3 policemen including station in-charge suspended |
लोकल पब्लिक न्यूज़ | मधुबनी
बिहार में नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब पटना एसटीएफ ने मधुबनी जिले के बासोपट्टी थाना क्षेत्र में 419 किलोग्राम गांजा की बड़ी खेप बरामद की। इस कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि तस्करों की पिकअप गाड़ी को कथित तौर पर स्थानीय पुलिस की डायल-112 वाहन सुरक्षा प्रदान कर रही थी। इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
नेपाल सीमा से लाई जा रही थी गांजे की खेप
सूत्रों के अनुसार, पटना एसटीएफ को सूचना मिली थी कि नेपाल सीमा के रास्ते भारी मात्रा में गांजा बिहार के जरिए अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर शनिवार तड़के करीब चार बजे बासोपट्टी क्षेत्र में छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान एसटीएफ ने गांजा से लदी पिकअप को रोककर बड़ी सफलता हासिल की।
कार्रवाई में क्या-क्या बरामद हुआ?
एसटीएफ ने मौके से—
- 419 किलोग्राम गांजा बरामद किया।
- दो कथित तस्करों को गिरफ्तार किया।
- एक लाइनर (तस्करों का सहयोगी) को पकड़ा।
- डायल-112 के चालक को भी गिरफ्तार किया, जिस पर तस्करों की मदद करने का आरोप है।
पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि डायल-112 की पुलिस गाड़ी कथित रूप से तस्करों की पिकअप को एस्कॉर्ट कर रही थी ताकि वह बिना जांच के सुरक्षित आगे निकल सके। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है, तो यह मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठित अपराध में पुलिस की संभावित संलिप्तता का गंभीर उदाहरण माना जाएगा।
थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए बासोपट्टी थानाध्यक्ष विकास कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया गया। उनके स्थान पर प्रभार संभाल रहे एसआई मुन्ना कुमार और डायल-112 प्रभारी एएसआई हीरा पंडित को भी निलंबित कर दिया गया है। वहीं, प्राथमिकी में डायल-112 के चालक को भी नामजद किया गया है।
एसपी और डीआईजी ने संभाली जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए मधुबनी के एसपी योगेंद्र कुमार और दरभंगा प्रक्षेत्र के डीआईजी मनोज कुमार तिवारी स्वयं मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की। अधिकारियों ने मामले की गहन जांच के निर्देश दिए हैं।
नेपाल सीमा से जुड़ा इलाका पहले भी रहा है संवेदनशील
मधुबनी का सीमावर्ती क्षेत्र नेपाल से जुड़ा होने के कारण लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर गांजा, शराब और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की खेप पकड़ती रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तस्करी के नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिल रहा था?
बरामद गांजे की कीमत पर भी सवाल
प्रारंभिक जानकारी में बरामद 419 किलो गांजा की कीमत करीब 5 लाख रुपये बताई गई है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि अवैध बाजार में इतनी बड़ी मात्रा की कीमत इससे कहीं अधिक हो सकती है। वास्तविक मूल्य का आकलन जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।
यह मामला सिर्फ बड़ी मात्रा में गांजा बरामद होने का नहीं, बल्कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही का भी है। यदि पुलिसकर्मियों पर लगे आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह बिहार में नशा तस्करी के नेटवर्क और पुलिस की भूमिका को लेकर बड़ा खुलासा साबित हो सकता है।
फिलहाल जांच के केंद्र में तीन अहम सवाल हैं—
- क्या यह केवल कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत का मामला है?
- क्या इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क सक्रिय है?
- नेपाल से बिहार और फिर अन्य राज्यों तक नशे की सप्लाई चेन में और कौन-कौन शामिल हैं?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। हालांकि, एसटीएफ की कार्रवाई और पुलिस अधिकारियों के निलंबन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह बिहार में नशा तस्करी और पुलिस तंत्र के बीच कथित गठजोड़ का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा साबित हो सकता है।

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