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आदापुर थाने में निजी मुंशी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, आर्म्स लाइसेंस सत्यापन के नाम पर मांगे थे 14 हजार रुपये

 A private clerk at Adapur police station was arrested red-handed for accepting a bribe; he had demanded ₹14,000 in the name of verifying an arms license.

A private clerk at Adapur police station was arrested red-handed for accepting a bribe; he had demanded ₹14,000 in the name of verifying an arms license.

लोकल पब्लिक न्यूज़/पूर्वी चंपारण: आदापुर पुलिस थाने में भ्रष्टाचार की एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। निगरानी  की टीम ने थाने के निजी मुंशी इंतखाब आलम को 14 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी आर्म्स लाइसेंस सत्यापन और थाने की मुहर लगवाने के नाम पर ली जा रही रिश्वत के मामले में हुई है।

पीड़ित आफताब एक पूर्व सैनिक हैं। उनके पिता के नाम पर पुराना आर्म्स लाइसेंस था। पिता की मृत्यु के बाद आफताब ने लाइसेंस को अपने नाम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए जरूरी कागजात सत्यापन के लिए आदापुर थाना भेजे गए।

थाने में काम कर रहे इंतखाब आलम ने कागजात पर थाने की मुहर लगाने और सत्यापन पूरा करने के बदले 14 हजार रुपये  रिश्वत मांगी। आफताब ने इसकी शिकायत निगरानी विभाग में की। शिकायत मिलते ही विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया। जब आफताब ने इंतखाब आलम को 14 हजार रुपये दिए, तभी टीम ने उन्हें मौके पर दबोच लिया।

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की रिश्वतखोरी नहीं, बल्कि आदापुर थाने में चल रही गंभीर अनियमितताओं को उजागर करता है। 

- फर्जी/निजी मुंशी की नियुक्ति: इंतखाब आलम कोई सरकारी पुलिसकर्मी नहीं है। वह प्राइवेट/निजी मुंशी के रूप में सालों से थाने में काम कर रहा था। पुलिस नियमों के अनुसार थाने में मुंशी की ड्यूटी केवल अधिकृत हेड कांस्टेबल या अनुभवी कांस्टेबल को ही सौंपी जा सकती है। बाहर से किसी सिविलियन को थाने में मुंशी बनाकर काम करवाना पूरी तरह अवैध है।

थाने का मुंशी थानेदार (एसएचओ) की प्रत्यक्ष निगरानी में काम करता है। इंतखाब आलम जैसे निजी व्यक्ति को सालों तक थाने में बिना किसी आधिकारिक पद के काम करने देने का मतलब है कि थानाध्यक्ष या तो इसकी अनुमति दे रहे थे या जानबूझकर अनदेखी कर रहे थे। कई रिपोर्ट्स में थानाध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

- रिश्वत का तरीका: आर्म्स लाइसेंस जैसे संवेदनशील मामले में भी रिश्वत मांगना आम बात बन गई थी। मुंशी की भूमिका में इंतखाब आलम FIR लिखना, रजिस्टर मेंटेन करना, ड्यूटी लगाना और कागजातों पर मुहर लगाने जैसी जिम्मेदारियां निभा रहा था। इससे आम लोगों को थाने में काम कराने के लिए अनावश्यक परेशानी और आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा था।

थाने में दलाली का दरबार: खबरों में कहा जा रहा है कि इस गिरफ्तारी के बाद थाने में हड़कंप मच गया है और अंदरखाने चल रहे कई अन्य अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं। निगरानी टीम के साथ मोतिहारी पुलिस भी  एसडीपीओ के नेतृत्व में संयुक्त छापेमारी कर रही है।

1. थाने में निजी व्यक्ति को मुंशी का काम करने देने की अनुमति किसने दी और क्यों?

2. पिछले कई वर्षों में इंतखाब आलम ने कितने लोगों से रिश्वत ली होगी?

3. आर्म्स लाइसेंस, FIR, ड्यूटी रजिस्टर जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं में निजी व्यक्ति की भागीदारी से सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ रहा था?

4. क्या यह मामला अकेला है या पूर्वी चंपारण के कई थानों में ऐसी प्रथा चल रही है?

मोतिहारी पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। निगरानी विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना हो रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आरोपी इंतखाब आलम को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ की जा रही है।

यह घटना बिहार पुलिस में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है, लेकिन साथ ही यह दिखाती है कि थाने के अंदरूनी स्तर पर अभी भी सुधार की बहुत गुंजाइश है। आम नागरिकों को बिना रिश्वत दिए थाने में अपना काम कराने का अधिकार है — इस मूल सिद्धांत को मजबूत करने की जरूरत है।

अगर थानाध्यक्ष या अन्य अधिकारियों की भूमिका में कोई लापरवाही पाई गई तो उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि अन्य थानों में भी ऐसी अनियमितताओं पर शिकंजा कसा जाएगा। 

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