मारपीट केस से नाम हटाने के लिए मांगे थे 10 हजार, शिकायत पर बिछाया जाल।
10,000 was demanded to remove the name from the assault case, a trap was laid on the complaint.
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| 10,000 was demanded to remove the name from the assault case, a trap was laid on the complaint. |
बिहार के सारण जिले के डोरीगंज थाना में तैनात सब-इंस्पेक्टर मोहित मोहन को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने 9,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई बुधवार सुबह की गई, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, डोरीगंज थाने में स्थानीय निवासी रमेश कुमार प्रसाद के आवेदन पर दर्ज मारपीट के एक मामले (प्राथमिकी संख्या 123/26) में आरोपी का नाम पुलिस डायरी से हटाने के बदले दरोगा ने 10,000 रुपये की मांग की थी। बाद में 9,000 रुपये पर सौदा तय हुआ।
पीड़ित ने इसकी शिकायत निगरानी ब्यूरो से की, जिसके बाद टीम ने मामले का सत्यापन कर जाल बिछाया। योजना के तहत शिकायतकर्ता को दरोगा के निजी आवास पर पैसे देने भेजा गया। जैसे ही दरोगा ने रिश्वत की रकम हाथ में ली, सादे कपड़ों में मौजूद विजिलेंस टीम ने मौके पर ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान 9,000 रुपये नकद बरामद किए गए।
इस कार्रवाई की पुष्टि विजिलेंस के डीएसपी वसीम अहमद ने की है। आरोपी दरोगा से पूछताछ जारी है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह घटना एक बार फिर पुलिस व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करती है, जहां आम नागरिक को न्याय के लिए भी घूस देने पर मजबूर होना पड़ता है। एक साधारण मारपीट मामले में नाम हटाने के लिए रिश्वत मांगना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पुलिस की साख पर भी सवाल खड़ा करता है।
हालांकि, निगरानी ब्यूरो की त्वरित कार्रवाई यह दिखाती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां सक्रिय हैं और शिकायत मिलने पर सख्त कदम उठा रही हैं। यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है।
फिर भी, बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि थानास्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

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