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उद्घाटन के बाद बंद पड़ा दीपऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, इलाज के लिए भटक रहे ग्रामीण

 Deepau Community Health Center closed after inauguration, villagers wandering for treatment

Deepau Community Health Center closed after inauguration, villagers wandering for treatment.

 (लोकल पब्लिक न्यूज़):पूर्वी चम्पारण जिले के कोटवा प्रखंड अंतर्गत दीपऊ गांव में जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र/हॉस्पिटल को स्थानीय लोगों के बेहतर इलाज की उम्मीदों के साथ शुरू किया गया था, वह आज खुद बदहाली का शिकार हो चुका है। दिनांक 2 अक्टूबर 2025 को राजद विधायक मनोज कुमार यादव द्वारा विधिवत उद्घाटन किए गए इस हॉस्पिटल में फिलहाल ताले लटके हुए हैं।



स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हॉस्पिटल पिछले कई महीनों से पूरी तरह बंद है। उद्घाटन के समय बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि अब आसपास के ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन हकीकत यह है कि आज मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी निजी क्लीनिक या कोटवा व मोतिहारी का रुख करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि हॉस्पिटल भवन तो बनकर तैयार है, लेकिन न तो नियमित डॉक्टर बैठते हैं और न ही कोई स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध है। कई बार गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को इलाज के अभाव में परेशानी झेलनी पड़ी है। लोगों में गहरी नाराजगी है कि उद्घाटन के बाद भी हॉस्पिटल चालू नहीं हो पाया, जिससे सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस मामले में कोटवा पीएचसी के प्रभारी डॉक्टर गौरव कुमार ने बताया कि

“हॉस्पिटल में स्थायी बिजली कनेक्शन नहीं है। बिजली के अभाव में वहां स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से नहीं चलाई जा सकतीं, इसी कारण हॉस्पिटल बंद है।”

वहीं, जब इस पूरे मामले पर बिजली विभाग के एडीओ (ग्रामीण) से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया गया, तो कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। न तो यह स्पष्ट किया गया कि बिजली कनेक्शन क्यों नहीं दिया गया और न ही यह बताया गया कि समस्या का समाधान कब तक होगा।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि मौजूदा समय में हॉस्पिटल बंद होने के बावजूद कोई भी विभाग या जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही लेने को तैयार नहीं दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन—तीनों के बीच समन्वय की कमी साफ नजर आ रही है।

अब सवाल यह उठता है कि—

क्या बिना मूलभूत सुविधाओं के हॉस्पिटल का उद्घाटन सिर्फ औपचारिकता था?

बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी जरूरत अब तक क्यों पूरी नहीं की गई?

और सबसे अहम, इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?

ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द बिजली कनेक्शन की व्यवस्था कर हॉस्पिटल को चालू किया जाए, ताकि दीपऊ और आसपास के गांवों के लोगों को प्राथमिक और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो लोगों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

फिलहाल, दीपऊ का यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उद्घाटन के बाद बंद पड़े सिस्टम की एक और मिसाल बनकर रह गया है। 

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